POEMSep 14, 2026
अपना धर्म निभाना पड़ता है
कठिन राहों पर चलने के लिए मंज़िल से पहले हौसले की ज़रूरत होती है।
ज़िंदगी की राह आसान हो, यह ज़रूरी नहीं। ज़रूरी यह है कि कठिन राह पर भी कदम बढ़ाने का साहस बना रहे।
The Pathak1 min read
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कठिन राहों पर चलने के लिए मंज़िल से पहले हौसले की ज़रूरत होती है।
ज़िंदगी की राह आसान हो, यह ज़रूरी नहीं। ज़रूरी यह है कि कठिन राह पर भी कदम बढ़ाने का साहस बना रहे।
A poem on ambition, solitude, and the quiet path of creation.
कुछ रास्ते तन्हा भी होते हैं, हर मोड़ पर मंज़िल का निशान नहीं होता...